शुक्रवार, 23 मार्च 2012

Hemlata ma'am ke liye

कितनी उम्र काफी होती है

कब कहते हैं
बस बाकी नेक्स्ट क्लास में करेंगे

गतांक से आगे की यात्रा आपकी
अकेली है....
न डर है गलते शरीर का
न चिंता, न दुनिया की उगाई हुई समझदारी की बेल , दम घोंटती हुई

बस एक सड़क है
जिसके किनारे की बेंच पर पन्ने हैं कुछ
और एक कलम है
--
मुझे नहीं पता हम कब मिलेंगे फिर
मैं बस स्टैंड से लौट चुका हूँ वापस , अपने कमरे में 
आपकी कलम के साथ
आपके पन्नों की कुछ कतरनों के साथ
--
मेरा प्यार आपको
आपकी यात्रा के लिए,नेक्स्ट क्लासों से दूर.......
और आभार
कि आपने मुझे कहना सिखाया, सुनना सिखाया
लिखना सिखाया
आदमी बनाया 

1 टिप्पणी:

  1. Unhone kitnon ko insaan banaya....kabhi kabhi lagta hai ki kitne saare log sirf unki wajah se ek doosre se jude hue hain....

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