बुधवार, 16 मार्च 2011

love 1

उनको चुप्पी से सुना करता था
उनकी क़दमों की आहट में
रास्तों के चेहरे बुना करता था

उनकी आवाज़ बरसी है आज घर पे मेरे
गीला गीला सा हूँ मुस्कुराता रहता हूँ 

2 टिप्‍पणियां:

  1. आपका ब्लॉग पसंद आया....इस उम्मीद में की आगे भी ऐसे ही रचनाये पड़ने को मिलेंगी

    कभी फुर्सत मिले तो नाचीज़ की दहलीज़ पर भी आयें-
    http://vangaydinesh.blogspot.com/
    http://dineshsgccpl.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं