शनिवार, 12 जून 2010

on bhopal ruling

किसी ने ठोका होता ट्रक  से
या पुल से दे दिया होता धक्का
तो बढ़ा भी सकते थे

अब इस मामले में तो  जितना बनता था दे दिया
दो साल

२५०००,
२५ साल
३ नस्लें सड़ गयी तेरे बुचडखाने में
ज़हर बेचने वालों के दल्लों ने फिर एक बार
थूक डाला है हमारे अधजले चेहरों पर

और खोलो कसाई खाने
बोटी बोटी काट कर हमारी रख दो गिरवी
हमारी सांस जला डालो अपने तेज़ाब से

गलती हो गयी इस बार जो आये दुनिया में
अगली बार इस नरक में जनम न लेंगे हम

2 टिप्‍पणियां:

  1. हर शब्‍द में गहराई, बहुत ही बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

    उत्तर देंहटाएं
  2. ये लिखने के लिए शुक्रिया| भोपाल मेरे भी गले की फांस है |

    उत्तर देंहटाएं