बुधवार, 4 मई 2011

album

खो गए घर 
फोटुओं में 
बस खराशें रह गयीं 

ईट पत्थर 
रह गए 
रिश्तों की फासें रह गयीं 

अब बना भी लोगे 
तो खाली ही बनता जायेगा 
अँधेरे में घूरता हुआ 
सवाली ही बनता जायेगा 

बंद कर के रख दो
धुएं के पिटारे को 
खुल गया तो
ये दिन बिचारा गुज़र न पायेगा 

3 टिप्‍पणियां:

  1. BAHUT KHUB BHAI ESE HI LIKHTE RAHO. . . . . . JAI HIND JAI BHARAT

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  2. बहुत ही सुन्दर लिखा है अपने इस मैं कमी निकलना मेरे बस की बात नहीं है क्यों की मैं तो खुद १ नया ब्लोगर हु
    बहुत दिनों से मैं ब्लॉग पे आया हु और फिर इसका मुझे खामियाजा भी भुगतना पड़ा क्यों की जब मैं खुद किसी के ब्लॉग पे नहीं गया तो दुसरे बंधू क्यों आयें गे इस के लिए मैं आप सब भाइयो और बहनों से माफ़ी मागता हु मेरे नहीं आने की भी १ वजह ये रही थी की ३१ मार्च के कुछ काम में में व्यस्त होने की वजह से नहीं आ पाया
    पर मैने अपने ब्लॉग पे बहुत सायरी पोस्ट पे पहले ही कर दी थी लेकिन आप भाइयो का सहयोग नहीं मिल पाने की वजह से मैं थोरा दुखी जरुर हुआ हु
    धन्यवाद्
    दिनेश पारीक
    http://kuchtumkahokuchmekahu.blogspot.com/
    http://vangaydinesh.blogspot.com/

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