सोमवार, 15 जून 2020

neend

देर रात तक
मेरा दिमाग
एक रेलवे प्लेटफार्म की तरह बिछा होता है
कुछ ख्याल चलते रहते हैं पैसिंजरों की तरह टहलते रहते हैं
पूरी रात
कुछ यादें ट्रेनों की तरह आती हैं
नींद नहीं आती

ये उम्र
इतनी लम्बी थकान
के कोई सो भी जाये बरसों
तो ख़त्म न हो

सोचता हूँ के कर लू वास्ता
फूल पत्तियों से
लोगों से बाज़ आऊं

क्या वक़्त है
जो टंगा रहता है
दम घोंटता है
गुज़रता भी नहीं
बदलता भी नहीं 

शुक्रवार, 22 मई 2020

April 2020

सड़कें थीं अंतहीन
नंगे पैर थे
और सर पर
एक पूरा घर
और चिलचिलाती धूप

क्यों लोग थालियां बजाते रह गए
जब रेलगाड़ी कुचल गयी उसका चेहरा

क्यों उसके खेतों का गेहूं
सड़ गया सरकारी गोदामों में
पर नहीं आया उसके काम

कभी जिन इमारतों के लिए
उसने ईटें ढोयीं
उनके दरवाज़े नहीं खुले
उसके लिए

किसका था ये मुल्क
जो उसका न हुआ
किसके थे ये लोग
जो उसके न हुए 

शनिवार, 11 जनवरी 2020

insomnia

कई रातों के बेसिरपैर सपने
दस्तावेज़ों की तरह गुथे हुए
रखे हैं ऐसे
जैसे मालगाड़ी का एक खाली डब्बा
एक अध् गुमी रेल की पटरी पर
खड़ा रहता है

ऐसा इंतज़ार किसका किया है

लोगों का, हालातों का, चीज़ों का, मौसमों का

कौन छांटेगा ये बैरंग सपने

रवाना करेगा इन्हें
नींद की डाक पर 

arzi

मैं तुम्हारी मोहब्बतों के काबिल हूँ
मुझसे इश्क़ करो
बड़ा इंतज़ार किया है मैंने
तुम्हारे तैयार होने का
मुझे बना लो अपनी सारी दुनिआ

बस मेरी बात सुनो
बस मेरा ज़िक्र करो

मुझे दे दो अपने ये सारे मौसम

ये गुनाहे अज़ीम भी कर लो
ये गुनाहे अज़ीम भी कर लो 

subah

इस तरह बना लें
हम अपनी सुबह
टेलीफोन के तारों में पिरो कर

चलें काफी दूर
और देखते चलें
क़दमों के तले
पार्कों में बिखरे हुए
यतीम लम्हों को
घर ले चलें 

rishta

रिश्ता दरख्वास्त है
हक़ नहीं है

एक पेड़ की छाँव
क्या पेड़ का इरादा है
या उसके वज़ूद का हिस्सा

क्या पेड़ इंकार कर सकता है
छाँव देने से

क्या हम-तुम
अलग हैं
पेड़ों से

क्या मुहब्बत आदमी की फितरत है
या उसका इरादा 

गुरुवार, 12 दिसंबर 2019

kabrgahon mein titliyan bhar do

कब्रगाहों में तितलियाँ भर दो
फ़ेंक दो तमाम चिट्ठियां तूफ़ान खाती लहरों में

कुछ मत सुनो कुछ मत देखो
लिख लिख कर खर्च करो
अपने अंदर का शोर

फिर माज़ी से आती कुछ आवाज़ों पर गौर करो
पहचानो वो कौन था
जो तुम्हारे जैसा था

और जो खोजता फिर रहा है
आज तक तुम्हें 

-

मेरे प्यार का पहला हासिल
तुम्हारी आज़ादी है
मेरी आज़ादी है

मेरे प्यार का अगला हासिल
सफर है
मेरी आज़ादी से तुम्हारी आज़ादी के बीच

मेरे प्यार का आखिरी हासिल
हमारा ख़त्म होना है 

bastiyan jalti hain

बस्तियां जलती हैं
उनका जड़ पकड़ना
उनका ख़त्म होना है

उन्हें तिरते रहने दो
मैन्ग्रोव के जंगलों की तरह
उन्हें छिपने दो
कचरे के ढेर के बीच
कुकुरमुत्ते की तरह

उनका अस्थ्याई होना
उनके स्थायी होने की पहली शर्त है

उनमें रहते लोगों की ज़िन्दगियों की तरह
उनके सपनों की तरह

उन प्लास्टिक के बुलबुलों की तरह
जो फटने के कगार पर
खड़ी रहती हैं बरसों 

-

अपने दौर की मानिंद
मैं भी ख़त्म हो रहा हूँ
सपनों के गुब्बारे
एक एक कर
निकलते जा रहे हैं
हाथों से
गीली कहानियों की तरह

क्या धोखा था
किसके साथ हुआ था
किसने किया था

रात के साथ बढ़ता है
लहरों का शोर
मैं देख रहा हूँ
ग़ुम होते हुए पैरों के निशान